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गीता नवम अध्याय, लोक 19

 गीता नवम अध्याय 

श्लोक ll 17 ll

तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्‌णाम्युत्सृजामि च।
 अमृतं चैव मृत्युश्च सदसच्चाहमर्जुन॥

हिंदी अनुवाद 

मैं ही सूर्यरूप से तपता हूँ, वर्षा का आकर्षण करता हूँ और उसे बरसाता हूँ। हे अर्जुन! मैं ही अमृत और मृत्यु हूँ और सत्‌-असत्‌ भी मैं ही हूँ  ॥

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