सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

श्रीमद भागवद गीता सप्तम अध्याय श्लोक ll 26 ll

गीता सप्तम अध्याय 

श्लोक ll 26 ll

वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन।
 भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन॥

हिंदी श्लोक वर्णन 

हे अर्जुन! पूर्व में व्यतीत हुए और वर्तमान में स्थित तथा आगे होने वाले सब भूतों को मैं जानता हूँ, परन्तु मुझको कोई भी श्रद्धा-भक्तिरहित पुरुष नहीं जानता ॥

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गीता षष्टम अध्याय, श्लोक ll 28 ll

गीता षष्टम अध्याय  श्लोक ll 28 ll युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी विगतकल्मषः।  सुखेन ब्रह्मसंस्पर्शमत्यन्तं सुखमश्नुते॥ हिंदी अनुवाद  वह पापरहित योगी इस प्रकार निरंतर आत्मा को परमात्मा में लगाता हुआ सुखपूर्वक परब्रह्म परमात्मा की प्राप्ति रूप अनन्त आनंद का अनुभव करता है ॥

गीता अध्याय ll 14 ll, श्लोक ll 9 ll

गीता अध्याय ll 14 ll श्लोक ll 9 ll सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत॥ हिंदी अनुवाद  हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुख में लगाता है और रजोगुण कर्म में तथा तमोगुण तो ज्ञान को ढँककर प्रमाद में भी लगाता है ॥

गीता षष्टम अध्याय, श्लोक ll 43 ll

गीता षष्टम अध्याय  श्लोक ll 43 ll तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्‌।  यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन॥ हिंदी अनवाद  वहाँ उस पहले शरीर में संग्रह किए हुए बुद्धि-संयोग को अर्थात समबुद्धिरूप योग के संस्कारों को अनायास ही प्राप्त हो जाता है और हे कुरुनन्दन! उसके प्रभाव से वह फिर परमात्मा की प्राप्तिरूप सिद्धि के लिए पहले से भी बढ़कर प्रयत्न करता है ॥