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गीता श्लोकl 8l

गीता नवम अध्याय 

श्लोक  ll8 ll

प्रकृतिं स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः।
 भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशं प्रकृतेर्वशात्‌॥

हिंदी अनुवाद 

अपनी प्रकृति को अंगीकार करके स्वभाव के बल से परतंत्र हुए इस संपूर्ण भूतसमुदाय को बार-बार उनके कर्मों के अनुसार रचता हूँ ॥

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