गीता दशम अध्याय, श्लोक ll 31 ll नवंबर 27, 2020 गीता दशम अध्याय श्लोक ll 31 llपवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्।झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी॥हिंदी अनुवाद मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ ॥ शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप लेबल श्रीमद भगवद गीता हिंदी श्लोक वर्णन शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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