सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

गीता नाम अध्याय श्लोक 17

गीता नवम अध्याय

श्लोक ll 17 ll


पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः।
 वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च॥

हिंदी अनुवाद 

इस संपूर्ण जगत्‌ का धाता अर्थात्‌ धारण करने वाला एवं कर्मों के फल को देने वाला, पिता, माता, पितामह, जानने योग्य, (गीता अध्याय 13 श्लोक 12 से 17 तक में देखना चाहिए) पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ ॥

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

गीता अध्याय ll 18 ll, श्लोक ll 14 ll

गीता अध्याय ll 18 ll श्लोक ll 14 ll अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्‌। विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम्‌॥ हिंदी अनुवाद इस विषय में अर्थात कर्मों की सिद्धि में अधिष्ठान (जिसके आश्रय कर्म किए जाएँ, उसका नाम अधिष्ठान है) और कर्ता तथा भिन्न-भिन्न प्रकार के करण (जिन-जिन इंद्रियादिकों और साधनों द्वारा कर्म किए जाते हैं, उनका नाम करण है) एवं नाना प्रकार की अलग-अलग चेष्टाएँ और वैसे ही पाँचवाँ हेतु दैव (पूर्वकृत शुभाशुभ कर्मों के संस्कारों का नाम दैव है) है ||

गीता अध्याय ll 18 ll, श्लोक ll 68 ll

गीता अध्याय ll 18 ll श्लोक ll 68 ll य इमं परमं गुह्यं मद्भक्तेष्वभिधास्यति। भक्तिं मयि परां कृत्वा मामेवैष्यत्यसंशयः॥ हिंदी अनुवाद  जो पुरुष मुझमें परम प्रेम करके इस परम रहस्ययुक्त गीताशास्त्र को मेरे भक्तों में कहेगा, वह मुझको ही प्राप्त होगा- इसमें कोई संदेह नहीं है ॥

गीता अध्याय ll16 ll, श्लोक ll 9 ll

गीता अध्याय ll16 ll श्लोक ll 8 ll एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः। प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽहिताः॥ हिंदी अनुवाद इस मिथ्या ज्ञान को अवलम्बन करके- जिनका स्वभाव नष्ट हो गया है तथा जिनकी बुद्धि मन्द है, वे सब अपकार करने वाले क्रुरकर्मी मनुष्य केवल जगत्‌ के नाश के लिए ही समर्थ होते हैं ||