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गीता सप्तम अध्याय, श्लोक ll 6 ll

गीता सप्तम  अध्याय  श्लोक ll 6 ll एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय।  अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा॥ हिंदी अनुवाद  हे अर्जुन! तू ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से ही उत्पन्न होने वाले हैं और मैं सम्पूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूँ अर्थात्‌ सम्पूर्ण जगत का मूल कारण हूँ ॥

गीता सप्तम अध्याय, श्लोक ll 4-5 ll

गीता सप्तम अध्याय  श्लोक ll 4-5 ll भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च।  अहङ्‍कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा॥  अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्‌।  जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत्‌॥ हिंदी अनुवाद पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार भी- इस प्रकार ये आठ प्रकार से विभाजित मेरी प्रकृति है। यह आठ प्रकार के भेदों वाली तो अपरा अर्थात मेरी जड़ प्रकृति है और हे महाबाहो! इससे दूसरी को, जिससे यह सम्पूर्ण जगत धारण किया जाता है, मेरी जीवरूपा परा अर्थात चेतन प्रकृति जान ॥

गीता सप्तम अध्याय, श्लोक ll 3 ll

गीता सप्तम अध्याय  श्लोक ll 3 ll मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये।  यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्वतः॥ हिंदी अनुवाद  हजारों मनुष्यों में कोई एक मेरी प्राप्ति के लिए यत्न करता है और उन यत्न करने वाले योगियों में भी कोई एक मेरे परायण होकर मुझको तत्व से अर्थात यथार्थ रूप से जानता है ॥

गीता सप्तम अध्याय, श्लोक || 2 ||

गीता शप्तम अध्याय  श्लोक ll 2 ll ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः।  यज्ज्ञात्वा नेह भूयोऽन्यज्ज्ञातव्यमवशिष्यते॥ हिंदी अनुवाद  मैं तेरे लिए इस विज्ञान सहित तत्व ज्ञान को सम्पूर्णतया कहूँगा, जिसको जानकर संसार में फिर और कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रह जाता ॥

गीता सप्तम अध्याय, श्लोक ll 1 ll

गीता सप्तम अध्याय  श्लोक ll 1 ll  श्रीभगवानुवाच  मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः।  असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु॥ हिंदी अनुवाद  श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्त चित तथा अनन्य भाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्यादि गुणों से युक्त, सबके आत्मरूप मुझको संशयरहित जानेगा, उसको सुन ॥

गीता षष्टम अध्याय, श्लोक ll 47 ll

गीता षष्टम अध्याय  श्लोक ll 47 ll योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना।  श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः॥ हिंदी अनुवाद  सम्पूर्ण योगियों में भी जो श्रद्धावान योगी मुझमें लगे हुए अन्तरात्मा से मुझको निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है  ॥     ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे आत्मसंयमयोगो नाम षष्ठोऽध्यायः   ॥6॥

गीता षष्टम अद्याय

गीता षष्टम अध्याय  श्लोक ll 46 ll तपस्विभ्योऽधिको योगी ज्ञानिभ्योऽपि मतोऽधिकः।  कर्मिभ्यश्चाधिको योगी तस्माद्योगी भवार्जुन॥ हिंदी अनुवाद  योगी तपस्वियों से श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानियों से भी श्रेष्ठ माना गया है और सकाम कर्म करने वालों से भी योगी श्रेष्ठ है। इससे हे अर्जुन! तू योगी हो ॥